Hindi Poem

By anonymous

सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो,
अब गोविंद ना आएंगे

छोड़ो मेहंदी खड़ग संभालो
खुद ही अपना चीर बचा लो
द्यूत बिछाए बैठे शकुनि,
… मस्तक सब बिक जाएंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो,
अब गोविंद ना आएंगे

कब तक आस लगाओगी तुम,
बिक़े हुए अखबारों से,
कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से
स्वयं जो लज्जा हीन पड़े हैं
वे क्या लाज बचाएंगे
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो
अब गोविं ना आएंगे

कल तक केवल अंधा राजा,
अब गूंगा – बहरा भी है
होंठ सिल दिए हैं जनता के,
कानों पर पहरा भी है
तुम ही कहो ये अश्रु तुम्हारे,
किसको क्या समझाएंगे?
सुनो द्रोपदी शस्त्र उठालो, अब गोविंद
ना आएंगे….

Advertisements

About Shiv Rana

A veteran of the Indian Army.
This entry was posted in Poetry and tagged . Bookmark the permalink.

1 Response to Hindi Poem

  1. Awesome! check out my poems too!

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s