पानी का रंग

पानी का रंग

गौर से देखा एक दिन

तो पाया कि

पानी का भी एक रंग हुआ करता है

अलग बात है यह कि

नहीं मिल पाया इस रंग को आज तक

कोई मुनासिब नाम

अपनी बेनामी में भी जैसे जी लेते हैं तमाम लोग

आँखों से ओझल रह कर भी अपने मौसम में

जैसे खिल उठते हैं तमाम फूल

गुमनाम रह कर भी

जैसे अपना वजूद बनाये रखते हैं तमाम जीव

पानी भी अपने समस्तय तरल गुणों के साथ

बहता आ रहा है अलमस्‍त

निरन्तर इस दुनिया में

हरियाली की जोत जलाते हुए

जीवन की फुलवारी में लुकाछिपी खेलते हुए

अनोखा रंग है पानी का

सुख में सुख की तरह उल्ललसित होते हुए

दुःख में दुःख के विषाद से गुजरते हुए

कहीं कोई अलगा नहीं पाता

पानी से रंग को

रंग से पानी को

कोई छननी छान नहीं पाती

कोई सूप फटक नहीं पाता

और अगर ओसाने की कोशिश की किसी ने

तो खुद ही भीग गया वह आपाद मस्तक

क्योंदकि पानी का अपना पक्का रंग हुआ करता है

इसलिए रंग छुड़ाने की सारी प्रविधियाँ भी

पड़ गयीं इसके सामने बेकार

किसी कारणवश

अगर जम कर बन गया बर्फ

या फिर किसी तपिश से उड़ गया

भाप बन कर हवा में

तब भी बदरंग नहीं पड़ा

बचा रहा हमेशा एक रंग

प्यास के संग-संग

अगर देखना हो पानी का रंग

तो चले जाओ

किसी बहती हुई नदी से बात करने

अगर पहचानना हो इसे

तो किसी मजदूर के पसीने में

पहचानने की कोशिश करो

तब भी अगर कामयाबी न मिल पाये

तो शरद की किसी अलसायी सुबह

पत्तियों से बात करती ओस की बूँदों को

ध्यान से सुनो

अगरचे बेनाम से इस पनीले रंग को

इसकी सारी रंगीनियत के साथ

बचाये रखना चाहते हो

तो बचा लो

अपनी आखों में थोड़ा-सा पानी

जहाँ से फूटते आये हैं

रंगों के तमाम सोते।

पानी का रंग

गौर से देखा एक दिन

तो पाया कि

पानी का भी एक रंग हुआ करता है

अलग बात है यह कि

नहीं मिल पाया इस रंग को आज तक

कोई मुनासिब नाम

अपनी बेनामी में भी जैसे जी लेते हैं तमाम लोग

आँखों से ओझल रह कर भी अपने मौसम में

जैसे खिल उठते हैं तमाम फूल

गुमनाम रह कर भी

जैसे अपना वजूद बनाये रखते हैं तमाम जीव

पानी भी अपने समस्तय तरल गुणों के साथ

बहता आ रहा है अलमस्‍त

निरन्त र इस दुनिया में

हरियाली की जोत जलाते हुए

जीवन की फुलवारी में लुकाछिपी खेलते हुए

अनोखा रंग है पानी का

सुख में सुख की तरह उल्ललसित होते हुए

दुःख में दुःख के विषाद से गुजरते हुए

कहीं कोई अलगा नहीं पाता

पानी से रंग को

रंग से पानी को

कोई छननी छान नहीं पाती

कोई सूप फटक नहीं पाता

और अगर ओसाने की कोशिश की किसी ने

तो खुद ही भीग गया वह आपादमस्त क

क्योंदकि पानी का अपना पक्काह रंग हुआ करता है

इसलिए रंग छुड़ाने की सारी प्रविधियाँ भी

पड़ गयीं इसके सामने बेकार

किसी कारणवश

अगर जम कर बन गया बर्फ

या फिर किसी तपिश से उड़ गया

भाप बन कर हवा में

तब भी बदरंग नहीं पड़ा

बचा रहा हमेशा एक रंग

प्यारस के संग-संग

अगर देखना हो पानी का रंग

तो चले जाओ

किसी बहती हुई नदी से बात करने

अगर पहचानना हो इसे

तो किसी मजदूर के पसीने में

पहचानने की कोशिश करो

तब भी अगर कामयाबी न मिल पाये

तो शरद की किसी अलसायी सुबह

पत्तियों से बात करती ओस की बूँदों को

ध्यान से सुनो

अगरचे बेनाम से इस पनीले रंग को

इसकी सारी रंगीनियत के साथ

बचाये रखना चाहते हो

तो बचा लो

अपनी आखों में थोड़ा-सा पानी

जहाँ से फूटते आये हैं

रंगों के तमाम सोतें ।

Col Shiv Om Rana, PhD

Mob +9199999 078 seven zero

email: shivranaatgmaildotcom

twitter handle: @happyshiv
To know more about me please click here.

It is only when we silent the blaring sounds of our daily existence that we can finally hear the whispers of truth that life reveals to us, as it stands knocking on the doorsteps of our hearts………. K T Jong

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About Shiv Rana

A veteran of the Indian Army.
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