उफ! ये सोच

उफ! ये सोच ! ! !

सोचते-सोचते…

दिमाग की नसें फूल गई हैं

ये भूल गई हैं सोना

साथ ही भूल गई हैं

सोते हुए ‘इस आदमी’ को

सपने दिखाना

रात-दिन बस एक काम

सोचना…सोचना…स ोचना

विचार की सूखी-बंज़र धरती को

खोदकर पानी निकालने की कोशिश में

पता है…

हर रोज़ तारीख़ें ही नहीं बदल रही

बहुत कुछ बदल रहा है….

कुछ पहचान वालों की

उधार बढ़ती जा रही है

और उधार देनेवालों की फेहरिस्त भी

कुछ पहचानवालों की

बेचैनी बढ़ गई है…

वो अनजान बन जाने के लिए

बेचैन हो उठे हैं….

और दिमाग है

कि कमबख़्त सोचता जा रहा है…

पेट की आग कुरेदती है…

तो भूख सोचती है..

पहचानवालों की उधार से

ये आग बुझ जाती है

तो फिर दिन सोचता है…

रात सोचती है

प्राइवेट नौकरी की मार सोचती है

बॉस की फटकार सोचती है..

बेगार सोचता है…

फटी जेब का फटेहाल सोचता है

एक आम आदमी का दिमाग

इक्कसवीं सदीं में …

बा-ख़ुदा !!!

क्या-क्या जंजाल सोचता है???
By अभिषेक पाटनी ……….Dec 2011

Col Shiv Om Rana, PhD

Mob +9199999 078 seven zero

email: shivranaatgmaildotcom

twitter handle: @happyshiv

Wisdom tells me I am nothing. Love tells me I am everything. And between the two my life flows.…..Nisargadatta Maharaj

Twitter Latest tweet: उफ! ये सोच: Please read my post in Google+ https://t.co/pKmwnAqt Follow @happyshiv twitter_reply.png Reply twitter_retweet.png Retweet 07:36 Mar-17

pixel.png?p=mozilla&v=3.9.12&t=1332118735364&u=2a2c28641609b03c

Advertisements

About Shiv Rana

A veteran of the Indian Army.
This entry was posted in Poetry. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s